महाराष्ट्र अदालत ने एक बड़े झटके में मध्य प्रदेश के निवासी को ड्रग्स तस्करी के मामले में पांच साल की सजा दी है। यह कार्रवाई उस ऑपरेशन का नतीजा है जिसमें पुलिस ने सीमा पर ट्रक की तलाशी ली और नशीले पदार्थों का जखीरा बरामद किया।
टिपर से मिली खबर पर पुलिस ने चेकपोस्ट पर नजर रखी। वाहन रोकने पर छिपे डिब्बों से प्रतिबंधित ड्रग्स निकले। जांच से खुलासा हुआ कि आरोपी एक सिंडिकेट का अहम सदस्य था, जो एमपी के अवैध कारखानों से सप्लाई कर रहा था।
मुकदमे में केमिकल टेस्ट, कॉल रिकॉर्ड और साथियों के बयान प्रमुख सबूत बने। बचाव पक्ष ने बेगुनाही का दावा किया, लेकिन सबूतों ने झूठ बेनकाब कर दिया। जज ने सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसी करतूतें समाज की जड़ें काट रही हैं।
फैसले के बाद पुलिस ने संयुक्त अभियान शुरू किया है। बॉर्डर पर नई तकनीकें लगाई जा रही हैं। इस केस से नेटवर्क के अन्य सदस्यों पर शिकंजा कस सकता है। नशामुक्त भारत अभियान को यह सफलता मिली है।