पाकिस्तान को प्रबंधन स्तर पर महिलाओं की न्यूनतम उपस्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सबसे निचला स्थान मिला है। प्रबंधकीय पदों पर 8 प्रतिशत से भी कम महिलाएं होने का यह आंकड़ा लिंग आधारित असंतुलन की गहरी समस्या को रेखांकित करता है।
कारण जटिल हैं—परिवारिक जिम्मेदारियां, असुरक्षित कार्य वातावरण और प्रोन्नति में पूर्वाग्रह प्रमुख हैं। शहरी केंद्रों में थोड़ी प्रगति हुई है लेकिन कुल मिलाकर स्थिति निराशाजनक बनी हुई है। कोविड के बाद आर्थिक मंदी ने महिलाओं की नौकरियों पर सबसे ज्यादा असर डाला।
निजी कंपनियों में परिवारिक व्यवसाय पुरुष उत्तराधिकार को प्राथमिकता देते हैं। वैश्विक कंपनियां भले ही विविधता पर जोर दें लेकिन स्थानीय प्रभाव सीमित है। सरकार की योजनाएं जैसे महिला आरक्षण प्रभावी क्रियान्वयन के अभाव में विफल साबित हो रही हैं।
सुधार के उपाय सुझाए जा रहे हैं: समावेशी भर्ती, मेंटरशिप कार्यक्रम और लचीले कार्य घंटे। महिला नेतृत्व वाले उद्योग बेहतर प्रदर्शन करते हैं यह सिद्ध हो चुका है। पाकिस्तान को यदि समृद्धि चाहिए तो अपनी महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देना होगा। बदलाव की बेला आ चुकी है—इसे गंवाने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता।