ओडिशा राजनीति में भूचाल आ गया जब बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक ने दो विधायकों को पार्टी विरोधी हरकतों के चलते निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई पार्टी में अनुशासन लागू करने की दिशा में बड़ा संदेश है।
[एमएलए1] और [एमएलए2] को निलंबन पत्र में साफ शब्दों में पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया। हाल के दिनों में इनकी गतिविधियों ने नेतृत्व को चिंतित कर दिया था। पटनायक ने बिना देर किए एक्शन लिया।
चुनावी हार के बाद बीजद में फूट की आशंका बढ़ रही थी। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली यह पार्टी अब विपक्ष की भूमिका निभा रही है। यह निलंबन बगावत रोकने का प्रयास माना जा रहा है।
पार्टी मीटिंग्स में इन विधायकों के विद्रोही तेवर सामने आए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए। एक प्रवक्ता ने कहा, ‘वफादारी हमारी ताकत है।’
विपक्ष ने इसे बीजद की कमजोरी बताया, जबकि समर्थकों ने सराहना की। निलंबित विधायक अब क्या करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। उपचुनाव नजदीक हैं और गठबंधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
पटनायक का नेतृत्व एक बार फिर परखा जा रहा है। ओडिशा की जनता अंततः तय करेगी कि यह कदम सही था या नहीं। बीजद के लिए यह टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।