सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2023 में भारत की बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत पर अडिग रही, जो कोविड-19 के बाद श्रम बाजार के धीरे-धीरे ठीक होने का प्रमाण है।
विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी बेरोजगारी 5.1 प्रतिशत और ग्रामीण 4.6 प्रतिशत रही। महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 37 प्रतिशत तक पहुंची, जो एक वर्ष पूर्व के 32 प्रतिशत से बेहतर है, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं का परिणाम।
निर्माण और कृषि क्षेत्रों ने श्रमिकों को सोखा, जबकि वस्त्र उद्योग में मंदी का असर पड़ा। पीएलएफएस बुलेटिन के अनुसार कार्यरत-जनसंख्या अनुपात 58.2 प्रतिशत पर पहुंचा।
अंडरएम्प्लॉयमेंट एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जहां कई लोग कम उत्पादकता वाले कार्यों में अटके हैं। गिग इकोनॉमी प्लेटफॉर्म और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र इसकी पूर्ति कर रहे हैं।
आरबीआई और आईएमएफ के विश्लेषकों ने इस प्रवृत्ति की सराहना की, लेकिन मुद्रास्फीति के दबाव से भर्ती प्रभावित होने की चेतावनी दी। 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के अनुमान के साथ आगे की गिरावट की उम्मीद है। यह रिपोर्ट न केवल आंकड़े हैं, बल्कि नीतियों की प्रभावशीलता और आर्थिक गतिशीलता का प्रमाण हैं।