बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार अब चरम पर पहुंच चुके हैं, खासकर चुनावों के नजदीक आते ही। भारतीय खुफिया एजेंसियां इसे ‘असाधारण’ बताते हुए चेतावनी जारी कर रही हैं कि यह हिंसा पूरे देश में फैल चुकी है।
एचआरसीबीएम की रिपोर्ट के अनुसार, 6 जून 2025 से 5 जनवरी 2026 के दौरान 116 अल्पसंख्यकों की हत्या हुई। पहले सीमित इलाकों तक रहने वाली यह हिंसा अब आठों डिवीजनों और 45 जिलों को जकड़ चुकी है।
खुफिया सूत्रों का कहना है कि यूनुस सरकार के दौरान जमात और आईएसआई के सहयोग से यह अभियान तेज हुआ है। अपराधी किसी भी शासन के बावजूद रुकने को तैयार नहीं, उनका लक्ष्य अल्पसंख्यकों का सफाया लगता है।
इसके पीछे भारत को भड़काने की मंशा भी दिखती है। दशकों से अल्पसंख्यक आबादी घटी है—1946 के 30% से 2020 में 9% तक। प्रशासन इन्हें व्यक्तिगत झगड़े बताता है, लेकिन जांच से निशाना बनाना साबित होता है।
चुनाव पूर्व और हिंसा की आशंका है, क्योंकि कट्टर ताकतें वोटरों को ध्रुवीकृत करना चाहती हैं। वैश्विक दबाव जरूरी है इस संकट को रोकने के लिए।