कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मोदी सरकार की आर्थिक रिपोर्टिंग पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने महंगाई-समायोजित जीडीपी आंकड़ों को ‘छलावा’ करार देते हुए कहा कि ये देश की असली आर्थिक तस्वीर को ढक रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रमेश ने रियल जीडीपी की कमियों को ब्योरा दिया। ‘महंगाई समायोजन से विकास दर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है,’ उन्होंने कहा।
उन्होंने बेरोजगारी दर 45 प्रतिशत, ग्रामीण संकट और विनिर्माण क्षेत्र की सुस्ती के आंकड़े पेश किए। ‘रियल जीडीपी 7 प्रतिशत दिखा रही है, लेकिन नॉमिनल हकीकत में यह ठहराव ही है।’
रमेश ने 2011-12 आधार वर्ष को पुराना बताते हुए कहा कि डिफ्लेटर धांधलीपूर्ण हैं। सब्जी-ईंधन महंगाई को नजरअंदाज किया जा रहा है। दोनों जीडीपी आंकड़ों को समानांतर जारी करने की मांग की।
वैश्विक एजेंसियां भी भारत की वृद्धि दर घटा रही हैं। रमेश ने पूर्व यूपीए काल की पारदर्शिता का हवाला दिया। ‘हमने आंकड़ों से खेला नहीं।’
सरकार ने इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया, लेकिन महंगाई का दंश झेल रही जनता के बीच रमेश की बात गूंज रही है। बजट सत्र से पहले यह बहस और तेज होगी।
आर्थिक आंकड़ों पर भरोसा बहाल करने के लिए सुधार जरूरी हैं, यही रमेश का मूल संदेश है।