मौत को भी मात दे दी आयोना ने। इलिनॉय की इस 22 वर्षीय छात्रा ने एनसेफलाइटिस से जंग हार ली, लेकिन उनके अंगदान ने सात से अधिक लोगों को नई जिंदगी दी। परिवार ने आयोना की पहले से दर्ज इच्छा को पूरा कर अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को हरी झंडी दिखाई, जो आज देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
आयोना नर्स बनने का सपना देखती थीं। पढ़ाई के साथ-साथ वे जरूरतमंदों की सेवा में जुटी रहती थीं। अचानक बीमारी ने उन्हें कोमा में डाल दिया। ब्रेन डेड होने पर डॉक्टरों ने परिवार से बात की। पिता माइकल बोले, ‘यह आयोना का आखिरी उपहार था।’ उनके हृदय ने अटलांटा में एक बच्चे को धड़कन दी, फेफड़े एम्फसीमा के मरीज को सांसें, लीवर कैंसर पीड़ित को राहत।
ओर्गन डोनेशन की कमी से जूझ रहे अमेरिका में आयोना जैसी कहानियां वरदान हैं। उनके विश्वविद्यालय ने स्मृति कोष बनाया, जो जागरूकता फैला रहा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों से दान पंजीकरण बढ़ गया। भाई ने कहा, ‘बहन की विरासत अमर है।’
आयोना की बेमिसाल उदारता हर दिल को छू रही। यह संदेश देती है कि एक फैसला लाखों जिंदगियां बचा सकता। परिवार अब दूसरों को प्रेरित करने में जुटा है।