मैनुअल वित्तीय ऑडिट के दौर का अंत हो सकता है, क्योंकि सरकार ने वित्तीय रिपोर्टों की निगरानी के लिए AI-संचालित प्लेटफॉर्म पेश किया है। आज घोषित यह पहल सार्वजनिक वित्त प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की बड़ी छलांग है।
हजारों वित्तीय दस्तावेजों का प्रतिदिन विश्लेषण करने के लिए डिजाइन किया गया यह सिस्टम प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण और डीप लर्निंग का उपयोग कर छिपी अंतर्दृष्टि उजागर करता है। यह डेटा को बेंचमार्क, नियामक मानकों और पिछले रुझानों से क्रॉस-चेक करता है तथा जोखिमों की तत्काल चेतावनी देता है।
इस तकनीक का केंद्र एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड है जो मंत्रालयों और विभागों को उनकी वित्तीय स्थिति का सहज विजुअलाइजेशन प्रदान करता है। लॉन्च के दौरान वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम केवल निगरानी ही नहीं कर रहे, बल्कि वित्तीय खतरों की भविष्यवाणी और रोकथाम कर रहे हैं।’
भारतीय AI कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी साझेदारों के सहयोग से विकसित यह प्लेटफॉर्म स्वचालित अनुपालन जांच और फोरेंसिक विश्लेषण उपकरणों से लैस है। परीक्षण चरणों में पारंपरिक तरीकों की तुलना में 35 प्रतिशत तेजी से बजटीय भिन्नताओं की पहचान हुई।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह पहल संसाधन आवंटन को अनुकूलित कर रिसाव रोकने में सहायक होगी। हालांकि, एल्गोरिदम पर अत्यधिक निर्भरता के आलोचक मानव विवेक की भूमिका पर जोर देते हैं। सरकार ने धीरे-धीरे कार्यान्वयन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आश्वासन दिया है। भविष्य में ब्लॉकचेन एकीकरण से यह वैश्विक स्तर पर वित्तीय निगरानी का मानक बन सकता है।