राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। जमीयत उलेमा के मुखिया मौलाना अरशद मदनी के बयान ‘कट्टरपंथी विचार के लोग दोनों तरफ’ पर कांग्रेस सांसद उदित राज ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इसे भ्रामक और असंगत बताया।
एक वीडियो संदेश में राज ने कहा, ‘समानता का ढोंग बंद हो। कट्टरता के आयाम अलग हैं- एक में संगठित हिंसा, दूसरे में वैचारिक अतिवाद। इसे मिलाने से समस्या हल नहीं होती।’ उनका यह बयान वायरल हो गया।
मदनी ने अपनी सभा में दोनों धर्मों के चरमपंथ पर चिंता जताई और एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। लेकिन उदित राज ने ऐतिहासिक संदर्भ गिनाते हुए अस्वीकार किया। उन्होंने हालिया घटनाओं का हवाला दिया।
दलित और बौद्ध पृष्ठभूमि वाले राज का यह रुख विपक्ष में बहस छेड़ रहा है। सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए। ट्रेंडिंग टैग्स ने बहस को हवा दी।
चुनावी माहौल में कांग्रेस मुस्लिम वोटों को साधने की again कोशिश में है, वहीं राज हिंदू वोटरों की चिंताओं को संबोधित कर रहे हैं। जमीयत का प्रभाव मुस्लिम बेल्ट में मजबूत है।
जानकारों का मानना है कि यह टकराव गठबंधन के लिए चुनौती बन सकता है। राज ने समाधान के रूप में अंतरधार्मिक समितियों का सुझाव दिया।
भारत जैसे बहुलवादी देश में ऐसे विवाद सामान्य हैं, लेकिन इनसे सबक लेना जरूरी। क्या बयानबाजी संवाद में बदलेगी या तनाव बढ़ेगा- समय जवाब देगा।