सिद्धांत चतुर्वेदी का ताजा बयान बॉलीवुड में हंगामा मचा रहा है। उन्होंने छोटे शहरों के स्क्रिप्ट राइटर्स की मुश्किलों को बेबाकी से उजागर किया। वेबिनार में बोलते हुए एक्टर ने बताया कि कैसे आर्थिक तंगी, भाषाई पूर्वाग्रह और नेटवर्किंग की कमी इन लेखकों को पीछे धकेलती है।
‘कानपुर के पास के गांव का लेखक अपनी जिंदगी की सच्ची घटनाओं पर कहानी लिखे, लेकिन फिल्मी खानदान न होने से अनदेखा रह जाता है,’ सिद्धांत ने उदाहरण दिया। उन्होंने अस्वीकृति के बिना फीडबैक की समस्या पर भी रोशनी डाली।
उन्होंने समाधान सुझाए- ऑनलाइन पिचिंग प्लेटफॉर्म, क्षेत्रीय वर्कशॉप और प्रोड्यूसर्स के लिए संवेदीकरण। ‘विविधता से ही हम बेहतर कहानियां सुना सकेंगे,’ उनका मानना है। युवा लेखकों ने उनके समर्थन की सराहना की है।
यह आवाज बॉलीवुड को झकझोर रही है। सिद्धांत की अपील पर अमल हो तो इंडस्ट्री अधिक समावेशी बनेगी, जो दर्शकों की सच्ची उम्मीदों पर खरी उतरेगी। बदलाव की बयार बहने लगी है।