बीएमसी चुनावों के महासमर में एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने उद्धव ठाकरे को मुसलमानों का खुला दुश्मन बताते हुए जोरदार कटाक्ष किया। मुंबई की एक सभा में उन्होंने ठाकरे की ‘सेकुलर छवि’ को नकारते हुए कहा कि शिवसेना का मूल चरित्र कभी नहीं बदला।
‘बाल ठाकरे से लेकर उद्धव तक, पार्टी हमेशा अल्पसंख्यकों के खिलाफ रही। अब वोट के लिए नौटंकी हो रही है,’ पठान ने समर्थकों से कहा। यह बयान महाराष्ट्र सियासत में भूचाल ला सकता है।
बीएमसी चुनावों का महत्व किसी विधानसभा से कम नहीं। 52 हजार करोड़ के बजट वाली यह संस्था मुंबईवासियों के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। बाढ़, गड्ढे, कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर जनता का गुस्सा उफान पर है।
पठान ने ठाकरे सरकार के कार्यकाल का जायजा लेते हुए मुसलमानों के साथ कथित भेदभाव के आरोप लगाए। एआईएमआईएम मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
शिवसेना (यूबीटी) ने इसे ‘विभाजनकारी बयानबाजी’ करार दिया। एके शिंदे गुट और बीजेपी भी इस मुद्दे को भुनाने की again में हैं। महाविकास अघाड़ी के गठबंधन पर भी सवाल उठे हैं।
कानूनी अड़चनों के कारण लंबे समय से अधीनस्थ प्रशासक के राज में चल रही बीएमसी में बदलाव की बयार बह रही है। पठान के बयान से मुस्लिम मतदाताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
नतीजे क्या होंगे, यह तो वोटिंग के बाद पता चलेगा, लेकिन बीएमसी की सियासत अब और रोचक हो गई है।