महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार ने सिंचाई योजनाओं में हुई अनियमितताओं पर खुलकर बात की। 1999 से 2014 तक मंत्री रहते 25 हजार करोड़ की योजनाएं 70 हजार करोड़ तक पहुंच गईं, उन्होंने कबूला। ‘जल्दी में फैसले हुए, गलतियां हुईं,’ पवार ने कहा।
यह बयान चुनावी माहौल में आया, जिससे भाजपा ने मौके का फायदा उठाया। विपक्ष ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुप रहना संदिग्ध है। फडणवीस समेत नेता पूछ रहे हैं कि अब इतना बड़ा खुलासा क्यों? क्या एनसीपी की सरकार बचाने के लिए?
विदर्भ, मराठवाड़ा जैसे इलाकों में पानी की किल्लत के बीच ये परियोजनाएं किसानों की उम्मीद थीं। लेकिन सीएजी रिपोर्ट्स ने गड़बड़ियां उजागर कीं। अब प्रवर्तन निदेशालय को फिर सक्रिय होने की मांग हो रही है। पवार की भाजपा से नजदीकी इस मुद्दे को और जटिल बनाती है।
किसान नेता और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। पवार का यह कदम उनकी राजनीतिक पूंजी बढ़ाएगा या घटाएगा, यह वक्त बताएगा। महाराष्ट्र में जल और सियासत का खेल चरम पर है।