अभिनेत्री भानुप्रिया का जीवन संघर्षों से भरा है। स्कूल में हुई एक शर्मनाक घटना ने उन्हें पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर दिया। लेकिन भरतनाट्यम जैसे क्लासिकल डांस ने उनके भाग्य को बदल दिया और उन्हें सिल्वर स्क्रीन पर पहुंचा दिया।
संगीतकार पिता के घर जन्मी भानुप्रिया को नृत्य विरासत में मिला। स्कूल छोड़ने के बाद उन्होंने पूरी तन्मयता से डांस में डूब गईं। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शनों ने 1980 के दशक में फिल्मवालों को आकर्षित किया। तमिल हिट ‘अग्नि नटराजम’ में उनका आइटम सॉन्ग आज भी याद किया जाता है।
मणि रत्नम की इस फिल्म ने उन्हें स्टारडम की ऊंचाइयों पर पहुंचाया। फिर तेलुगु की ‘शक्ति’, कन्नड़ की ‘चैतन्य’ जैसी फिल्मों ने उनकी प्रतिभा को प्रमाणित किया। विविध भूमिकाओं में वे सफल रहीं और कई पुरस्कार जीते।
निजी जीवन की चुनौतियों के बावजूद भानुप्रिया ने हार नहीं मानी। अब वे चुनिंदा फिल्में करती हैं और डांस अकादमी चलाती हैं। उनकी आत्मकथा सरीखी यह कहानी बताती है कि शर्मिंदगी अस्थायी है, जबकि कला शाश्वत। युवा कलाकारों के लिए यह एक मिसाल है कि जुनून से सब कुछ संभव है।