भारतीय रेलवे ने एक बार फिर पारदर्शिता का परिचय दिया। ट्रेनों के नॉनवेज भोजन पर हलाल सर्टिफिकेशन अनिवार्य नहीं होने की पुष्टि करते हुए रेलवे ने प्रियंक कानूनगो के सवाल का जवाब दिया। यह बयान सोशल मीडिया पर उठे विवाद के बाद आया है।
प्रियंक कानूनगो ने ट्रेन भोजन की पैकेजिंग दिखाते हुए ट्वीट किया कि वेज में हलाल क्यों नहीं, नॉनवेज में क्यों? उनके बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी। रेलवे ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।
आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘केटरिंग में केवल एफएसएसएआई नियम लागू। हलाल या कोई अन्य धार्मिक सर्टिफिकेशन जरूरी नहीं।’ वेंडर्स को साफ-सफाई और लेबलिंग का पालन करना पड़ता है।
हलाल बहस के बीच रेलवे का यह कदम सराहनीय है। यह सार्वजनिक क्षेत्र में धार्मिक तटस्थता सुनिश्चित करता है। कानूनगो ने इसे ‘धर्मनिरपेक्षता की मिसाल’ कहा और अन्य क्षेत्रों में लागू करने की अपील की।
आईआरसीटीसी के 1000+ किचनों में नॉनवेज आइटम्स जैसे अंडा भुर्जी, फिश करी बनते हैं। सर्टिफिकेशन हटने से खरीद आसान, कीमतें नियंत्रित। यात्रियों को ऐप से ऑर्डर की सुविधा मिल रही है।
मुसाफिरों का मानना है कि सुरक्षा सर्वोपरि। रेलवे ऑडिट और फीडबैक से सुधार कर रहा। लंबी दूरी की ट्रेनों में विविधता बढ़ाने की योजना है।
यह घटना दिखाती है कि सोशल मीडिया जवाबदेही बढ़ाता है। रेलवे की 68,000 किमी नेटवर्क पर यात्री विश्वास बनाए रखेगा।