परिवारिक रस्में निभाने का वादा करते हुए बीजेपी सांसद रामकृपाल यादव ने कहा कि वे तेजप्रताप यादव के दही चूड़ा समारोह में कदम जरूर रखेंगे। यह घोषणा बिहार राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
फाल्गुन का यह प्रसिद्ध पर्व बिहार में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। दही चूड़ा मतलब सादा भोजन, लेकिन इसमें छिपी है गहरी सांस्कृतिक विरासत। तेजप्रताप, लालू परिवार के चिरपरिचित चेहरे, इसे जनसंपर्क का माध्यम बनाते हैं।
‘मैं तेजप्रताप के दही चूड़ा में जरूर जाऊंगा,’ रामकृपाल का यह बयान पुरानी कटुता को भुलाने का इशारा है। यादव भाइयों के बीच राजनीतिक दूरी रही है, खासकर चुनावी मैदानों में।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यादव समाज को एकजुट करने की कोशिश हो सकती है। बिहार चुनावों के मद्देनजर इसका राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी।
परिवार के अन्य सदस्यों की उपस्थिति से यह सामान्य उत्सव से ऊपर उठ सकता है। बिहार में त्योहार राजनीति के साथ जुड़ जाते हैं, और दही चूड़ा इसका जीता-जागता उदाहरण है।
यह घटना साबित करती है कि खानदानी रिश्ते टूटते नहीं, बस परिस्थितियां बदलती हैं। रामकृपाल की मौजूदगी से कार्यक्रम यादगार बनेगा।