सोवियत संघ के सहयोग से भारत का अंतरिक्ष दौरा इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। विंग कमांडर राकेश शर्मा ने सल्युट-7 पर पहली बार तिरंगा लहराया। वह पल जब उन्होंने ‘सारे जहाँ से अच्छा’ गाया, देश ने कभी नहीं भुलाया।
800 पायलटों में से चुने गए शर्मा ने स्टार सिटी में कठोर प्रशिक्षण लिया। 3 अप्रैल 1984 को सोयुज टी-11 ने उड़ान भरी। स्टेशन पर डॉकिंग के बाद प्रयोगों का दौर शुरू हुआ—पौधों की वृद्धि, हृदय गति निगरानी और भारत के मौसम पैटर्न का अध्ययन।
इंदिरा जी के सवाल पर शर्मा का शायराना अंदाज़ चैनलों पर लाइव आया। इकबाल का शेर सुनकर पूरा मुल्क झूम उठा। अंतरिक्ष से भारत का नक्शा दिखाते हुए उन्होंने सूखा प्रभाव और नदी प्रणालियों की जानकारी साझा की।
जीवन अंतरिक्ष में अनोखा था। तैरते भोजन, बंधी हुई नींद और ट्रेडमिल पर बंधा व्यायाम। शर्मा ने होली भी वजनहीनता में मनाई। हर चुनौती को उन्होंने विजय बनाया।
री-एंट्री के 8जी दबाव के बावजूद सुरक्षित लैंडिंग। सोवियत हीरो ऑफ द यूनियन और भारत रत्न समकक्ष सम्मान मिला। बाद में मिग-27 स्क्वाड्रन की कमान संभाली।
आज 75 वर्षीय शर्मा युवाओं को प्रेरित करते हैं। उनकी कहानी भारत की उड़ान का प्रतीक बनी हुई है। अंतरिक्ष में वह गान सिद्ध करता है—हिंदुस्तान सबसे अच्छा।