गांधीनगर की धरती पर पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की बैठक ने बेबी अरिहा शाह के दर्द भरे केस को नई दिशा दी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के बयान से साफ है कि भारत इस मामले को द्विपक्षीय संबंधों जितना ही महत्व दे रहा है।
2018 में गुजरात से जर्मनी गए शाह दंपति की बेटी अरिहा को 2021 में मामूली चोट पर बच्ची संरक्षण एजेंसी ने छीन लिया। डॉक्टरों के संदेह पर शुरू हुई जांच में माता-पिता निर्दोष साबित हुए, फिर भी फॉस्टर केयर में डाल दिया गया। कोर्ट ने देखभाल की कथित लापरवाही से अधिकार समाप्त कर दिए।
भारतीय कूटनीति सक्रिय है। मिस्री ने जर्मन दूतावास, बर्लिन अधिकारियों से चर्चाओं का जिक्र किया। पीएम ने चांसलर से सीधे कहा कि कानूनीता से ऊपर मानवीयता हो। परिवार को हर कदम पर साथ दिया जा रहा—भारतीय त्योहार, समुदायिक मेलजोल, भाषा सीखने की व्यवस्था।
‘परिवार की व्यथा हम महसूस करते हैं, पूरी ताकत से मदद कर रहे,’ मिस्री ने कहा। जयशंकर की पिछली पहल के बाद अब मोदी स्तर पर बात। यूरोप डिवीजन नियमित अपडेट लेता है।
यह केस सांस्कृतिक पहचान की लड़ाई है। भारत का मानना है अरिहा को अपने माहौल में ही पालन-पोषण मिलेगा। लगातार फॉलो-अप से सकारात्मक परिणाम की आशा है। सरकार पारदर्शी रखेगी।