पाकिस्तान की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां (पीएसयू) लगातार घाटे में चल रही हैं, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचा रही हैं। विस्तृत रिपोर्ट में सामने आया है कि ये कंपनियां अक्षमता की भेंट चढ़ गई हैं, जिससे वित्तीय संकट और गहरा गया।
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) जैसे उदाहरणों में सालाना 300 मिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो रहा है। स्टील मिलें और रेलवे भी सरकारी सहायता पर टिकी हैं। ऊर्जा क्षेत्र में चोरी और बकाया वसूली न होने से सर्कुलर डेट रिकॉर्ड स्तर पर है।
इसका असर पूरे बजट पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य-शिक्षा पर खर्च घट रहा है, जबकि बेरोजगारी बढ़ रही है। जीडीपी वृद्धि 2 प्रतिशत से नीचे है, रुपया गिर रहा है। आईएमएफ निजीकरण की शर्त रख रहा है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कर्मचारियों की संख्या घटाई जाए, आधुनिक तकनीक अपनाई जाए। पड़ोसी देशों के सफल उदाहरण मौजूद हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही सुधार संभव है। अन्यथा, डिफॉल्ट का खतरा मंडरा रहा है।