माघ मेले के विशाल पंडालों में इस बार एक नागा साधु ने धूम मचा दी। 11 हजार रुद्राक्ष बीजों की भारी माला गले में लटकाए और शरीर पर चंदन भस्म पोते हुए वे संगम नगरी में विचरण कर रहे थे, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
प्रयागराज का यह मेला हर साल फरवरी में आयोजित होता है, जहां साधु-संतों के दर्शन का विशेष महत्व है। इस साधु का स्वरूप देखकर श्रद्धालुओं की आंखें ठहर गईं। रुद्राक्ष माला तपस्या के गहन स्तर को दर्शाती है, जबकि भस्म शिव की भक्ति का प्रतीक बनी।
भीड़ में से एक ने कहा, ‘ये तो जिंदा शिव हैं।’ अखाड़ों के अन्य साधुओं ने भी उनका स्वागत किया। मेला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, क्योंकि दर्शनार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी।
ऐसे मेले भारत की सनातन परंपराओं को संजोए रखते हैं। नागा साधु न केवल आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक एकता के भी। वायरल तस्वीरों से माघ मेला की ख्याति देश-विदेश में फैल रही है।
आगामी दिनों में और भी साधु-संतों के दर्शन होंगे, लेकिन इस नागा साधु की छाप लंबे समय तक रहेगी। माघ मेला आस्था का ऐसा अवसर है, जो आत्मिक शांति प्रदान करता है।