बनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस का हस्तक्षेप तब सुर्खियों में आ गया जब ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का शांतिपूर्ण जुलूस रोक दिया गया। एनएसयूआई अध्यक्ष ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार करार दिया। छात्रों का यह मार्च ग्रामीण रोजगार योजना को खतरे से बचाने के लिए था।
हजारों ग्रामीण परिवारों के लिए मनरेगा जीवनरेखा है, जो 100 दिन का गारंटीड काम सुनिश्चित करती है। बजट में कटौती की अफवाहों ने चिंता बढ़ाई है। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर योजना को कमजोर करने का आरोप लगाया।
द्वार पर भारी सुरक्षा बल तैनात होने से भिड़त की नौबत आई, लेकिन हिंसा नहीं हुई। एनएसयूआई ने इसे राजनीतिक दबाव बताया, जबकि पुलिस ने शांति बनाए रखने का हवाला दिया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए।
योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाया। भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं, लेकिन लाभ निर्विवाद। एनएसयूआई राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन तेज करेगी। यह घटना परिसर राजनीति को नई दिशा दे सकती है।