मिथुन चक्रवर्ती का स्वामी विवेकानंद पर आधारित फिल्म को सराहा गया और उन्हें खास अवॉर्ड मिला। इस प्रोजेक्ट में 11 साल तक शोध में जुटे रहने की उनकी कहानी प्रेरणादायक है।
विवेकानंद की जीवनी को साकार करने के लिए मिथुन ने गहन तैयारी की। उन्होंने विवेकानंद के पूर्ण वांग्मय पढ़े, बेलूर मठ गए और उनके भाषणों का अभ्यास किया। यह केवल अभिनय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा थी।
फिल्म रामकृष्ण मिशन की स्थापना से लेकर विश्व धर्म संसद तक के प्रसंगों को खूबसूरती से दिखाती है। मिथुन ने संन्यासी के रूप में अपनी भूमिका निभाई, जो दिल छू गई।
पुरस्कार समारोह में मिथुन बोले, ‘विवेकानंद के विचारों ने मेरी जिंदगी बदली।’ फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी धमाल मचाया।
यह उपलब्धि बायोपिक жанр को नई ऊंचाई देती है। मिथुन की मेहनत से साबित होता है कि धैर्य और सच्चाई से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।