एक भव्य साहित्यिक समागम में लेखकों ने तकनीक के प्रभाव, ज्ञान प्राप्ति और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि पर विचार मंथन किया। इस मंच ने भारत के बौद्धिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सवाल उठाए।
उदाहरणों से स्पष्ट हुआ कि ई-बुक्स और ऑडियोबुक्स ने साहित्य को व्यापक बनाया है। वीआर स्टोरीटेलिंग महाकाव्यों को नया आयाम दे रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर अफवाहों का खतरा बढ़ा है।
राष्ट्रीय संदर्भ में स्वदेशी इनोवेशन पर बल दिया गया। भाषाई विविधता संरक्षण के लिए एआई टूल्स की आवश्यकता बताई गई। डिजिटल साक्षरता अभियानों को गति देने की मांग उठी।
कार्यक्रम में नैतिक ज्ञान साझा करने वाले तकनीकी पारिस्थितिक तंत्र की रूपरेखा बनी। साहित्य और विज्ञान के संयोजन से राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। यह संवाद नीति निर्माण को प्रभावित करने वाला सिद्ध होगा।