तनावग्रस्त जीवन में हृदय रोग और मानसिक विकार आम हो गए हैं। नाड़ी शोधन प्राणायाम इनसे लड़ने का सरल हथियार है। प्राचीन योग विधि जो नाड़ी तंत्र को शुद्ध कर समग्र स्वास्थ्य प्रदान करती है।
यह प्रक्रिया श्वास के माध्यम से शरीर की 72 हजार नाड़ियों को सक्रिय करती है। हृदय के लिए लाभकारी क्योंकि यह रक्त संचार सुधारता है, तनाव हार्मोन कम करता है। अध्ययनों से सिद्ध है कि इससे हृदय गति सामान्य रहती है।
दिमाग को तेज करने में भी कमाल। मस्तिष्क तरंगों को संतुलित कर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। अवसाद, भूलने की समस्या दूर होती है। कार्यक्षमता में वृद्धि अनुभव होगी।
अभ्यास तरीका: पद्मासन या सुखासन में बैठकर विष्णु मुद्रा अपनाएं। दाहिनी नासिका अंगूठे से बंद, बाईं से गहरी सांस लें। दोनों बंद कर रोकें। दाहिनी से बाहर निकालें। चक्र उल्टा दोहराएं। प्रतिदिन 15 मिनट।
जरूरी सावधानियां: नाक बंद हो तो न करें। गर्भवती महिलाएं, मिर्गी रोगी परहेज करें। सुबह खाली पेट आदर्श। अधिक करने से चक्कर की शिकायत हो सकती है।
नाड़ी शोधन अपनाकर आप लंबी, स्वस्थ जिंदगी जी सकते हैं। योग गुरुओं की यह सिद्ध विधि आज भी प्रासंगिक है। आजमाएं और फर्क महसूस करें।