दिल्ली। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक Indo-जर्मन साझेदारी को नई दिशा देने वाली है।
दो दिनों की इस यात्रा में €20 अरब से अधिक के व्यापार को विस्तार देने पर जोर होगा। नवीकरणीय ऊर्जा, अर्धचालक और ऑटोमोटिव क्षेत्र प्रमुख चर्चा बिंदु हैं। जर्मन कंपनियां जैसे सीमेंस और फॉक्सवैगन भारत के विशाल बाजार में गहरी पैठ बनाने को तैयार हैं।
व्यापार-केंद्रित प्रतिनिधिमंडल के साथ आए मर्ज ‘मेक इन इंडिया’ से लाभ उठाने को इच्छुक हैं। सुरक्षा और रक्षा सौदों पर भी बात होगी, जिसमें पनडुब्बी और लड़ाकू विमान शामिल हैं।
क्षेत्रीय तनावों के बीच दोनों देश इंडो-पैसिफिक के लिए साझा दृष्टिकोण पर सहमत हो रहे हैं। सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए छात्र विनिमय और पर्यटन परियोजनाएं शुरू होंगी। जर्मनी में 40,000 से अधिक भारतीय छात्रों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य है।
यात्रा का समापन इंडो-जर्मन इनोवेशन सेंटर के उद्घाटन से होगा, जो दोनों देशों की प्रतिभा का मेल दर्शाएगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह गठबंधन स्थिरता का प्रतीक बनेगा। इस शिखर सम्मेलन के परिणाम महाद्वीपों तक गूंज सकते हैं।