राजस्थान के सवाई माधोपुर में कांग्रेस ने मनरेगा को भाजपा के ‘कुचक्र’ से बचाने का संकल्प लिया। एआईसीसी सचिव और विधानसभा उपनेता के नेतृत्व में उपवास-धरना शुरू हुआ, जो ग्रामीण अंचल में चर्चा का विषय बन गया।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि योजना का बजट घटाकर केंद्र ने गरीबों का गला घोंट दिया। राजस्थान में 2 हजार करोड़ के बकाया वेतन लंबित हैं। डिजिटल सिस्टम से लाखों जॉब कार्ड ब्लॉक हो चुके।
धरने पर श्रमिकों ने अपनी व्यथा सुनाई। एक बुजुर्ग ने कहा, ’20 साल की सेवा के बाद भूखे मरने को मजबूर कर दिया।’ युवा ब्रिगेड ने सोशल मीडिया पर अभियान चला लिया।
मांगें स्पष्ट- मजदूरी 300 रुपए प्रतिदिन, समयबद्ध भुगतान, ग्राम सभाओं को अधिकार। नेताओं ने कहा, ‘आखिरी सांस तक लड़ेंगे।’ भाजपा पर तंज कसते हुए बोले, ‘विकास का दावा करते हैं, लेकिन गांव भूखे हैं।’
रात भर सांस्कृतिक कार्यक्रम चले। जयपुर से समर्थन मिला। विश्लेषकों का मानना है कि यह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। मनरेगा का भविष्य दांव पर लगा है।