महाराष्ट्र के कोयला पट्टी में भ्रष्टाचार का एक और काला अध्याय उजागर हुआ, जब सीबीआई ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स के फोरमैन को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। यह घटना कोल इंडिया की सहायक कंपनी में व्याप्त अनियमितताओं को सामने लाती है।
ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के एवज में मोटी रकम वसूलने वाले इस फोरमैन की करतूतें लंबे समय से चर्चा में थीं। गुप्त जांच के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और रंगे हाथों पकड़ लिया। जब्त सामान में भारी नकदी और सबूत शामिल हैं।
डब्ल्यूसीएल की खदानों में अनुबंध प्रक्रिया, सामग्री आपूर्ति और सुरक्षा मंजूरी में यह फोरमैन मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ। नागपुर मुख्यालय वाली यह कंपनी देश की थर्मल पावर जरूरतों को पूरा करती है।
अदालत ने आरोपी को रिमांड पर भेज दिया है। पूछताछ में अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। कोयला उद्योग में ई-टेंडरिंग और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी सुधारों की मांग तेज हो गई है।
ऐसी कार्रवाइयां सार्वजनिक विश्वास को बहाल करने में मदद करेंगी। भविष्य में सख्ती से ऐसे रिश्वतखोरों पर लगाम लगेगी, जिससे राष्ट्रहित सर्वोपरि रहेगा।