आरएसएस के सदी भर के संघर्ष और समर्पण को चित्रित करने वाली फिल्म ‘शतक’ का गीत लिखते हुए संगीतकार राकेश कुमार पाल को अभूतपूर्व कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि यह सामान्य बॉलीवुड गीत नहीं, बल्कि एक वैचारिक धरोहर का संगीतमय रूप था।
संघ का इतिहास वीरता, सेवा और राष्ट्रनिष्ठा से भरा पड़ा है। ‘शतक’ में हedgeवर जी से लेकर वर्तमान तक के नेताओं की यात्रा, शाखाओं का विस्तार, विपत्ति काल में सहायता कार्य सब कुछ समेटा गया है। पाल के लिए गीत में इन भावनाओं को सहजता से उकेरना सबसे बड़ा टास्क था।
उन्होंने स्वयंसेवकों से प्रत्यक्ष बातचीत की, पुराने दस्तावेजों का अवलोकन किया। गीत को प्रचारक शैली में ढालते हुए आधुनिक लय का मिश्रण करना पड़ा। फिल्म के भव्य दृश्यों—नागपुर मुख्यालय से सीमावर्ती क्षेत्रों तक—के साथ तालमेल बिठाना भी जटिल रहा।
बार-बार संशोधन और संघ प्रचारकों की राय से गीत निखरा। शताब्दी समारोहों के बीच रिलीज होने पर यह गीत स्वयंसेवकों का गान बनेगा। पाल का कहना है कि इस चुनौती ने उन्हें नया आयाम दिया।
‘शतक’ भारतीय सिनेमा में वैचारिक फिल्मों का नया अध्याय रचेगी, जहां संगीत विचारों का सेतु बनेगा। यह युवाओं को अपने मूल्यों से परिचित कराएगी।