पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर क्षेत्र में चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह लड़खड़ा रही हैं। चिकित्सक समुदाय ने 26 जनवरी से व्यापक हड़ताल की घोषणा कर दी है। वेतन बकाया, दवाओं की किल्लत और खराब बुनियादी ढांचे ने हालात को असहनीय बना दिया है।
पीओके मेडिकल एसोसिएशन ने बताया कि 2000 से अधिक डॉक्टर इस आंदोलन में शामिल होंगे। अस्पतालों में 70 प्रतिशत दवाओं की कमी है। बिजली कटौती से वेंटिलेटर और डायलिसिस मशीनें ठप हैं। डॉ. शबीर हुसैन ने कहा, ‘हम चमत्कारों से इलाज कर रहे हैं।’
बाग और पूंछ क्षेत्रों में हालात सबसे खराब हैं। कैंसर रोगी बिना कीमोथेरेपी के तड़प रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं को प्रसव के दौरान उचित देखभाल न मिलने से मातृ मृत्यु दर बढ़ गई है। भूकंप राहत कोष के गबन ने अस्पतालों का बुरा हाल कर दिया।
गणतंत्र दिवस के समय इस घोषणा से राजनीतिक मायने भी बन गए हैं। स्थानीय युवा संगठन भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। डॉक्टरों ने वेतन भुगतान, दवाओं की आपूर्ति और कर्मचारियों की भर्ती की मांग की है।
सरकार की ओर से आंशिक समाधान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया। निजी क्लिनिक सरकारी अस्पतालों का भार नहीं झेल सकते। सड़कें बंद होने से आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है। लाल क्रॉस ने स्वास्थ्य अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज की है।
सर्दियों में फ्लू का प्रकोप चरम पर है। बिना केंद्रीय हस्तक्षेप के पीओके में स्वास्थ्य आपदा निश्चित है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट पर नजर रखे हुए है।