देश के प्रमुख उद्योग संगठन सीआईआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण में देरी को समाप्त करने की मांग की है। केंद्र सरकार को संबोधित पत्र में कहा गया है कि तेज निजीकरण से अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और सरकारी कंपनियां बाजार के अनुरूप ढल सकेंगी।
विनिवेश कार्यक्रम लंबे समय से ठप्प पड़ा है। बजट लक्ष्यों की आधी-अधूरी पूर्ति से निवेशक भरोसा कम हुआ है। सीआईआई का तर्क है कि निजी मालिकाना हक से कंपनियों में दक्षता, नवाचार और लाभप्रदता बढ़ेगी।
सीआईआई अध्यक्ष ने कहा, ‘बाजार की ताकतों को आजादी दें। निजीकरण वैश्विक स्तर पर सफल साबित हुआ है।’ एयर इंडिया और अन्य उदाहरणों का हवाला देते हुए संगठन ने तत्काल कार्रवाई की वकालत की।
बैंकिंग, बीमा, तेल और बिजली क्षेत्र निजीकरण के लिए तैयार हैं। सीआईआई ने सुझाव दिया कि बोली प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, कर्मचारियों को हिस्सेदारी दी जाए और मंजूरी प्रक्रिया सरल हो।
इससे होने वाली आय से इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ेगा। राजकोषीय घाटा कम होगा और विदेशी पूंजी आएगी। हालांकि, राजनीतिक चुनौतियां बरकरार हैं।
मोदी सरकार के सुधार एजेंडे में निजीकरण केंद्रीय भूमिका निभा सकता है। सीआईआई की अपील उद्योग जगत की एकजुट आवाज है। यदि अमल हुआ तो भारत की आर्थिक विकास दर को मजबूती मिलेगी।