स्वामी स्वप्रकाश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोमनाथ मंदिर की पवित्र ऊर्जा को भारत के अंतिम छोर तक ले जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा भी की।
सोमनाथ का महत्व असीम है। यह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है और भगवान शिव की अनंत कृपा का प्रतीक। मंदिर के इतिहास में आक्रमणों का सामना करने के बावजूद इसकी महिमा कभी कम नहीं हुई। स्वामीजी ने श्रोताओं को इसके चमत्कारों से रूबरू कराया।
‘यह ऊर्जा केवल गुजरात तक सीमित न रहे। बंगाल की खाड़ी से अरब सागर तक, हर राज्य में इसके प्रभाव से समाज मजबूत बनेगा,’ स्वामी स्वप्रकाश ने जोर देकर कहा।
पीएम मोदी पर बोलते हुए उन्होंने उल्लेख किया, ‘मोदी जी का मंदिरों के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है। सोमनाथ का सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास उनकी देन है।’
कार्यक्रम में साधु-संतों, ग्रामीणों और युवाओं ने भाग लिया। स्वामीजी ने सोशल मीडिया के जरिए इस ऊर्जा के प्रचार का सुझाव दिया। भक्तों ने संकल्प लिया कि वे सोमनाथ यात्रा को प्रोत्साहित करेंगे।
यह उद्बोधन आध्यात्मिक जागरण का संकेत है। सोमनाथ की शक्ति से ओतप्रोत भारत विश्व गुरु बनेगा, यह स्वामी स्वप्रकाश का दृढ़ विश्वास है।