दुनिया भर के हिंदू प्रवासी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर बांग्लादेशी हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार रोकने की सख्त मांग की है। वॉशिंगटन से जारी इस अपील में लिंचिंग, हत्याएं और सरकारी चुप्पी का खुलासा किया गया है।
युवा दीपू चंद्र दास की लिंचिंग और जिंदा जलाने जैसी वारदातों ने दर्द को हवा दी। 2024 के अगस्त से हिंसा भड़की, दिसंबर में और तेज। झूठे ईशनिंदा आरोपों पर हमले पुरानी परंपरा है, 2024 की मंडल हत्या इसका उदाहरण।
ऐतिहासिक अन्याय याद दिलाते हुए 1950 पैक्ट और 1971 शरणार्थी संकट का जिक्र। हिंदुओं को ‘नरसंहार’ झेलना पड़ रहा, मीडिया गुमराह अभियानों के बाद चुप।
चिन्मय कृष्ण दास को झूठे केस में जेल, जमानत से इनकार। अंतरिम सरकार सांप्रदायिकता से इंकार कर रही, जो खतरनाक संदेश देता है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के अनुसार, 2442+ हमले, दर्जनों हत्याएं। 2024 के अगस्त-नवंबर में 82 शव, पिछले 35 दिनों में 11 हिंदू मारे।
भारत से सार्वजनिक भर्त्सना, सुरक्षित रास्ते, रिफ्यूजी कैंप, यूएन जोन, वैश्विक मंच पर आवाज और आर्थिक दबाव की अपील। बिना कॉरिडोर के हिंदू फंस गए। अमेरिका के शहरों में 31 जनवरी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन होंगे। यह वैश्विक जागरूकता का आह्वान है।