अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मौजूदा हालात पर टिप्पणी की है। ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा कि ईरान पहली बार आजादी की दहलीज पर है और संयुक्त राज्य अमेरिका सहायता के लिए उत्सुक है।
देशभर में आर्थिक संकट के कारण प्रदर्शनकारियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। रियाल की अचानक गिरावट ने महंगाई को आसमान छू लिया है। दिसंबर अंत से चली आ रही ये आंदोलन आर्थिक नीतियों के खिलाफ हैं। सरकार ने समस्याओं को दूर करने का भरोसा दिया, लेकिन तोड़फोड़ पर सख्ती की बात भी कही।
ट्रंप ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों की हत्या पर अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। मीडिया से बात में उन्होंने स्पष्ट किया कि जवाब सैन्य आक्रमण नहीं, बल्कि लक्षित हमले होंगे जो सबसे गहरी चोट देंगे।
इस बयान पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने तीखा प्रहार किया। इसे आंतरिक मामलों में दखल और अमेरिकी शत्रुता का प्रमाण बताया।
फौज ने अहम स्थलों की सुरक्षा का वादा किया। प्रसारण माध्यमों से लोगों को दुश्मनीपूर्ण शक्तियों के खिलाफ एकजुट होने को कहा। इजरायल और आतंकी संगठनों को शांति भंग करने का जिम्मेदार ठहराया। ये ताकतें कथित तौर पर जनसमर्थन के बहाने बगावत भड़काना चाहती हैं।
सतर्कता बरतने और सामूहिक ताकत से मुकाबला करने का संदेश दिया।
ट्रंप की यह पहल ईरानी संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ला रही है। आर्थिक दबाव और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश का अगला कदम सभी की नजरों में है। वैश्विक शक्तियां सतर्क हो गई हैं।