देश ने लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें करारा नमन किया। यूनियन मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के श्रद्धासुमन से शास्त्री जी का सादा जीवन फिर चर्चा में आया।
ताशकंद समझौते के बाद 1966 में उनका असामयिक निधन हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समाधि पर जाकर कहा, ‘शास्त्री जी का 1965 युद्ध में योगदान अविस्मरणीय है।’
महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और अन्य ने संदेश दिए। शास्त्री जी ने खाद्यान्न संकट दूर किया और किसानों को सम्मान दिलाया।
राज्यों में सभाएं हुईं, जहां उनके नारे की प्रासंगिकता बताई गई। आज किसान आंदोलनों के समय उनका संदेश महत्वपूर्ण है।
शास्त्री जी रेल मंत्री पद से इस्तीफा देकर नैतिकता दिखाई। उनकी मृत्यु पर जांच की मांग तेज हो गई। कार्यक्रमों में वृत्तचित्र दिखाए गए।
शास्त्री जी की विरासत देश को प्रेरित करती रहेगी। नेताओं के समर्पण से उनका आदर्श जीवंत हो गया।