आतंक के साये और कागजी पेचीदगियों ने पाकिस्तानी महिलाओं के स्वास्थ्य उपचार को बंधक बना लिया है। नई रिपोर्ट इस गंभीर समस्या पर रोशनी डालती है, जिसमें महिलाओं के 70 प्रतिशत मेडिकल वीजा आवेदन असफल हो रहे हैं।
पेशावर में एक युवती को ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए तीन बार वीजा रिजेक्ट हुआ, क्योंकि दस्तावेज अपूर्ण थे। ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों किलोमीटर यात्रा के बाद चेकपोस्ट पर वापसी आम बात है। 2018 से 100 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले हुए हैं, जो डर का कारण बने हैं।
नीति विशेषज्ञ इमरान सिद्दीकी कहते हैं, ‘सुरक्षा नियम जरूरी हैं, लेकिन वे अब बाधा बन गए हैं।’ डिजिटल पोर्टल होने के बावजूद औसत प्रोसेसिंग 45 दिन लेती है। एधी फाउंडेशन जैसी संस्थाएं एस्कॉर्टेड काफिले चला रही हैं।
रिपोर्ट में सुझाव दिए गए हैं: कागजात सरल करें, प्रशिक्षण दें, और महिलाओं के लिए फास्ट-ट्रैक लेन बनाएं। इस्लामाबाद को तत्काल कार्रवाई करनी होगी, ताकि महिलाओं का स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित हो सके। अन्यथा, यह चुपचाप जारी रहेगा।