ढाका का तेज विकास आर्थिक प्रगति का प्रतीक हो सकता था, लेकिन अव्यवस्था ने इसे रहने लायक शहर से दूर कर दिया। शनिवार की रिपोर्ट में बताया गया कि आबादी और क्षेत्रफल में वृद्धि के बावजूद प्रबंधन की कमी से शहर जूझ रहा है। यातायात, आवास और बुनियादी सेवाओं की बदहाली प्रमुख मुद्दे हैं।
प्रथम आलो की रिपोर्ट कहती है कि ट्रैफिक जाम दर्द का सबब बना हुआ है। बिना योजना के घर बन रहे हैं, बिजली, पानी, गैस की सप्लाई खराब है। हरित क्षेत्रों और पैदल मार्गों का टोटा, शोरगुल व प्रदूषण सर्वव्यापी हैं। शहरव्यापी प्रबंधन संकट गहरा चुका है।
झोपड़पट्टियां तेजी से फैल रही हैं, जो बेदखली और आगजनी से चर्चा में रहती हैं। शहरीकरण ने आंकड़े बदल दिए, पर जीवनशैली, रोजगार, रिश्ते और बस्ती विकास पर उपेक्षा बरती गई।
बच्चों में कुपोषण, बाल विवाह, कम पढ़ाई, अपराध वृद्धि और इलाज की कमी चिंताजनक हैं। 2025 के लिवेबिलिटी इंडेक्स में ढाका 171वें पायदान पर। प्रदूषण रैंकिंग में सबसे ऊपर।
भीड़भाड़, जाम, बाढ़ का डर, कचरा mountains, धूल भरी सड़कें—ढाका उदासीन लगता है। गरीबी, विषमता, स्वास्थ्य संकट व शासन कमजोरी ने बर्बादी न्योता दी है। तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।