नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने शनिवार को राजनीतिक नेतृत्व की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार किया। राष्ट्रीय एकता दिवस से ठीक पहले पृथ्वी नारायण शाह की जयंती पर वीडियो संदेश में उन्होंने असंतुलन का आरोप लगाया, जो देश के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।
नेताओं पर बदलते वैश्विक परिदृश्य को न समझने का इल्जाम लगाते हुए कहा कि इससे सहयोगी राष्ट्रों का विश्वास डगमगा रहा है। पूर्व राजा ने अपने पूर्वज के दृष्टिकोण को प्रासंगिक बताया, लेकिन नीति की कमियों का खुलासा नहीं किया।
रक्षा के लिए ‘शांति की ढाल’ अपनाने का सुझाव दिया, जो अन्य देशों के सुरक्षा गठबंधनों से अलग है। युवाओं में व्याप्त हताशा, कुशलजन का पलायन और निवेशकों का देश छोड़ना गंभीर समस्या है। इस प्रवाह को न रोका गया तो विफल राष्ट्र का खतरा मंडरा रहा है।
युवा असंतोष को नजरअंदाज करने से विद्रोह भड़कता है, जेन-जी आंदोलन इसका उदाहरण है। ओली सरकार के पतन के बाद कार्की सत्ता में आईं, लेकिन 77 जानें और भारी क्षति की घटना सबक है।
लगभग 20 साल पहले सत्ता त्यागने का स्मरण कराया, जब उन्होंने जनता का भरोसा राजनीतिक दलों को सौंपा था। शांति-प्रगति के वचनों के बावजूद संकट गहराते जा रहे हैं। अब राष्ट्र का बचाव सर्वोपरि है।