आध्यात्मिक जगत के प्रमुख व्यक्तित्व सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने जेएनयू में छात्रों द्वारा लगाए गए विवादास्पद नारों पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान सर्वोच्च है और इसके विरुद्ध कोई भी कार्य अस्वीकार्य है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब जेएनयू में एक कार्यक्रम में छात्रों ने ऐसे नारे लगाए जो पाकिस्तान समर्थक और भारत विरोधी माने जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे देश को झकझोर दिया। पुलिस जांच और राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।
महाराज ने अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘न कोई व्यक्ति, न कोई संगठन संविधान से बड़ा है। जेएनयू जैसे संस्थान देशभक्ति सिखाएं, घृणा नहीं।’ उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टि से विश्लेषण किया कि राष्ट्र-प्रेम ही सच्ची भक्ति का आधार है।
जेएनयू का यह विवाद नया नहीं है। पहले भी कई बार कैंपस पर सेडिशन के आरोप लगे हैं। महाराज ने सरकार से अपील की कि विश्वविद्यालयों में कट्टर विचारधाराओं पर अंकुश लगाया जाए। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि विरोध प्रदर्शन संवैधानिक सीमाओं में रहें।
इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। सत्ताधारी दल ने इसे राष्ट्रहित में बताया, वहीं वामपंथी संगठनों ने आपत्ति जताई। महाराज की लोकप्रियता को देखते हुए यह मुद्दा और गरमा सकता है।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने युवाओं से संवाद की अपील की। उनका मानना है कि संविधान के प्रति निष्ठा ही देश को मजबूत बनाएगी। जेएनयू प्रशासन अब कदम उठाने को बाध्य है।
निष्कर्षतः, महाराज का यह दृढ़ मत न केवल जेएनयू विवाद सुलझाने में सहायक होगा, बल्कि पूरे शिक्षण संस्थानों के लिए मार्गदर्शक बनेगा। संविधान की जयकार करने का समय है।