आप नेता अलका लांबा ने अंकिता भंडारी मर्डर केस को सीबीआई के हवाले किए जाने का श्रेय जनता के उग्र आंदोलन को दिया है। उन्होंने कहा कि बिना जन दबाव के यह जांच कागजों में दफन हो जाती। ऋषिकेश के पास वनांतर रिसॉर्ट में 2022 की इस घटना ने बीजेपी सरकार की पोल खोल दी, जहां मंत्री पुत्र पुलकित आर्य पर युवती की हत्या का आरोप लगा।
अंकिता ने कथित यौन शोषण की मांग ठुकराई, तो नहर में धकेल दी गई। इसके बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया—महिलाएं आगे रहीं, छात्र सड़कों पर उतरे। लांबा ने बताया कि धरने, रैलियां और राज्यपाल को ज्ञापन दिए बिना सरकार नहीं हili। हाईकोर्ट ने जनता के PIL पर सीबीआई को सौंपा।
प्रेस वार्ता में लांबा ने सरकार को कोसा—सीसीटीवी नष्ट, गवाह दबाव में। सीबीआई ने अब छापे मारे, फाइनेंशियल ट्रेल जांचा। उन्होंने बीजेपी पर अपने लोगों को बचाने का इल्जाम लगाया। ‘अंकिता को इंसाफ मिलेगा, जनता सुनिश्चित करेगी।’
यह केस टूरिज्म क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाता है। लांबा का बयान आप को जनता का सच्चा साथी बताता है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा गरमाएगा। सीबीआई से नई जानकारियां उभरेंगी, जो न्याय की उम्मीद जगाएंगी। जन आंदोलन की ताकत फिर साबित हुई।