बीजिंग के रेयर अर्थ निर्यात पर नियंत्रण ने जापानी अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। बढ़ते तनाव के बीच जापान ने जी7 देशों और मित्र राष्ट्रों से सहानुभूति और समर्थन मांगा है।
वित्त मंत्री सत्सुकी कटायामा रविवार को अमेरिका पहुंचकर जरूरी खनिजों पर बातचीत करेंगी। रक्षा प्रमुख शिंजीरो कोइजुमी गुरुवार को वहां के समकक्षों से मिलेंगे। पीएम सनाए ताकाइची दक्षिण कोरिया के ली जे म्युंग से अगले हफ्ते जापान में मिलेंगी ताकि सामंजस्य बना रहे।
कटायामा ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि जी7 गैर-बाजार एकाधिकार को बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन की रणनीति को उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया।
सबका तर्क नवंबर में ताकाइची के ताइवान संबंधी बयान से जुड़ता है, जिस पर चीन ने दोहरी उपयोगिता वाली वस्तुओं का निर्यात बंद किया। व्यापार मंत्री रयोसेई अकाजावा बोले कि नुकसान का पूरा हिसाब लगाना मुश्किल, मगर अप्रैल से रेयर अर्थ पर रोक ने कार व इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को ठेस पहुंचाई।
कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेयर अर्थ के सहज व्यापार पर जोर दिया और चीनी बाधाओं को सप्लाई चेन के लिए घातक ठहराया। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, जापानी फर्मों को रेयर अर्थ और चुंबकों की सप्लाई ठप हो गई।
चीन पर 60 फीसदी निर्भर जापान भारी रेयर अर्थ के लिए तो पूरी तरह आश्रित है, जो ईवी और रक्षा क्षेत्रों में जरूरी हैं। अर्थशास्त्री आगाह कर रहे हैं कि लंबे समय तक यह दबाव बरकरार रहा तो नुकसान गहरा सकता है। जापान अब समुद्र तल पर खनिज अन्वेषण की ओर बढ़ रहा है, जैसा 2010 के संकट में प्रयास हुए थे।