मकर संक्रांति का त्योहार नजदीक आते ही बिहार का मंदार पर्वत श्रद्धा का केंद्र बन जाता है। यहां मधुसूदन मंदिर के पवित्र कुंड का पानी एक रात में ही लुप्त हो जाता है, जो प्रकृति और ईश्वर के रहस्य को उजागर करता है।
पौराणिक महत्व वाला यह पर्वत महाभारत और पुराणों में वर्णित है। समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल के रूप में प्रसिद्ध यह पहाड़ आज भी अपनी दिव्यता कायम रखे है। मंदिर में विराजमान भगवान मधुसूदन के दर्शन के लिए कुंड का महत्व असीम है।
हर साल संक्रांति से पूर्वाह्न से पानी गायब होने लगता है। गवाह बताते हैं कि कोई नाली या रिसाव नहीं, फिर भी कुंड शुष्क हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भू-आकृति विज्ञान से जुड़ा हो सकता है, किंतु तिथि की सटीकता चमत्कार ही लगती है।
उत्सव के पश्चात कुंड पुनः भरता है, भक्तों को जीवन चक्र की सीख देता हुआ। आसपास की गुफाओं में प्रागैतिहासिक चित्र और मूर्तियां इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत बयां करती हैं। पर्यटन विभाग ने सुविधाएं बढ़ाई हैं।
यह घटना आधुनिक युग में भी आस्था को मजबूत करती है, मंदार पर्वत को अमर बनाए रखती है।