अर्थशास्त्री महेंद्र देव के अनुसार, बढ़ते वैश्विक टैरिफों से निपटने के लिए भारत चार-सूत्री योजना पर अमल कर रहा है, जिससे चालू वर्ष में 7.4 प्रतिशत की विकास दर सुनिश्चित हो जाएगी। यह रणनीति देश की आर्थिक मजबूती को रेखांकित करती है।
पहला कदम बाजार विविधीकरण है। पश्चिमी देशों पर निर्भरता घटाकर ब्रिक्स और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रों पर फोकस। दवा निर्यात में अफ्रीका को 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
दूसरे स्थान पर ‘मेक इन इंडिया’ को गति। पीएलआई योजनाओं से सोलर मॉड्यूल्स में भारत का वैश्विक हिस्सा 20 प्रतिशत तक पहुंचा। नौकरियां बढ़ीं, आयात कम हुए।
तीसरा उपाय मुक्त व्यापार समझौते। भारत-यूएई सीईपीए ने द्विपक्षीय व्यापार 20 प्रतिशत उछाला। कनाडा, इजरायल के साथ डीलें अंतिम चरण में।
चौथा आधारभूत संरचना। गति शक्ति और भारतमाला परियोजनाएं लॉजिस्टिक्स लागत घटा रही हैं। 5जी और यूपीआई से व्यापार आसान।
आरबीआई की सतर्क नीतियां, अच्छा मानसून और हरित ऊर्जा पर जोर विकास को बल दे रहे। वैश्विक मंदी के दौर में भारत निवेशकों का पसंदीदा ठिकाना बन रहा है। भविष्य उज्ज्वल दिखता है।