साइमन टाउन के समुद्री अड्डे पर वैश्विक नौसैनिक ताकत का मेला सजा है। चीन, रूस व ईरान के युद्धपोतों ने दक्षिण अफ्रीका के तट पर लंगर डाला है। ‘विल फॉर पीस 2026’ नामक ब्रिक्स प्लस संयुक्त अभ्यास शनिवार से प्रारंभ हो गया, जो चीन की अगुवाई में 16 जनवरी तक चलेगा। मेजबान दक्षिण अफ्रीका ने इसे शिपिंग सुरक्षा और आर्थिक मार्गों की रक्षा का माध्यम बताया।
ब्रिक्स प्लस का विस्तार मूल सदस्यों ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं। अब मिस्र, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, इथियोपिया व यूएई भी इसमें शरीक हैं। यह गुट अमेरिका व पश्चिमी देशों के व्यापारिक वर्चस्व को चुनौती दे रहा है।
ट्रंप प्रशासन के ब्रिक्स-विरोधी रुख के बीच यह अभ्यास संवेदनशील है। ट्रंप ने इन्हें ‘अमेरिका-विरोधी’ करार देकर शुल्क वृद्धि की चेतावनी दी। दक्षिण अफ्रीकी सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल एमफो माथेबुला ने रॉयटर्स से कहा, ‘यह सैन्य अभ्यास है, राजनीति से परे। क्षमताओं को मजबूत करने और सूचना साझा करने का मंच।’
ब्राजील, मिस्र व इथियोपिया पर्यवेक्षक बने। दक्षिण अफ्रीकी बलों ने चीनी सीएनएस तांगशान, ताइहू, ईरानी आईरिस मकरान व स्वदेशी अमाटोला के डॉकिंग की तस्वीरें साझा कीं।
सिरिल रामफोसा गठबंधन में कुछ दलों ने तटस्थता भंग का आरोप लगाया, लेकिन माथेबुला ने पलटवार किया। उन्होंने अमेरिका के साथ पूर्व अभ्यासों का हवाला दिया। यह सैन्य मंच वैश्विक समुद्री गतिशीलता में बदलाव ला सकता है, जहां ब्रिक्स प्लस की एकजुटता नई शक्ति के संकेत दे रही है।