सेबी ने ट्रेडिंग नियमों में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जो अनुपालन की जटिलताओं को कम करके बाजार को अधिक कुशल बनाएगा। गुरुवार को जारी दस्तावेज बाजार मध्यस्थों के लिए राहत की सांस है। मार्जिन और कोलैटरल रिपोर्टिंग को पूरी तरह नया रूप दिया जाएगा।
अभी ब्रोकर कई प्रारूपों और समयसीमाओं में डेटा जमा करते हैं; सेबी एक मानकीकृत सिस्टम चाहता है जो रीयल-टाइम डेटा फीड्स से जुड़े। इससे ब्रोकरेज को सालाना लाखों रुपये की बचत हो सकती है। ट्रेड कन्फर्मेशन आसान होंगे और कम जोखिम वाले ट्रेड्स की निगरानी ढीली पड़ेगी।
इक्विटी डेरिवेटिव्स, जहां रोजाना 100 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर है, को सबसे ज्यादा फायदा होगा। एक शीर्ष एक्सचेंज अधिकारी ने ट्वीट किया, ‘बहुत जरूरी राहत।’ खुदरा भागीदारी दो सालों में 300 प्रतिशत बढ़ी है, जो मौजूदा सिस्टम पर दबाव डाल रही है।
सेबी एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग में बदलाव और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए सरल केवायसी का सुझाव भी दे रहा है। जोखिम कम करने के लिए निगरानी तकनीक मजबूत रहेगी। हितधारकों के पास 30 दिन हैं सुझाव देने के।
सफल कार्यान्वयन से लेन-देन लागत 10-15 प्रतिशत घट सकती है। सेबी का यह प्रयास भारतीय बाजारों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा, निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा। फीडबैक से अंतिम ढांचा बनेगा।