पश्चिम बंगाल सरकार ने आई-पैक पर ईडी छापों के विवाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राज्य ने केविएट दाखिल कर सुनवाई में भागीदारी सुनिश्चित की है। कलकत्ता हाईकोर्ट के जांच आदेश के बाद यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विवाद की जड़ में प्रशांत किशोर की आई-पैक फर्म है, जो टीएमसी के चुनावी सलाहकार के रूप में जानी जाती है। एजेंसी ने फेमा और पीएमएलए उल्लंघन के आरोप लगाते हुए ठिकानों पर छापे मारे। कथित तौर पर विदेशी फंड्स से चुनावी खर्च का पर्दाफाश हुआ।
सरकार इसे केंद्र का राजनीतिक हथियार बताती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर कहा, ‘हमारी जीत से डरने वाले यह गलत खेल खेल रहे हैं।’ केविएट याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
विपक्षी बीजेपी ने इसे स्वागतयोग्य बताया। सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘अवैध फंडिंग का खुलासा हो रहा है, जांच पूरी होनी चाहिए।’ कानूनी हलकों में चर्चा है कि मामला संवैधानिक बेंच तक पहुंच सकता है।
यह घटनाक्रम संघीय ढांचे पर सवाल उठाता है। राज्य की यह रणनीति न केवल देरी कराएगी बल्कि अपनी दलीलें रखने का मौका देगी। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
राज्य स्तर पर राजनीतिक माहौल गरम है, जो राष्ट्रीय चुनावों को प्रभावित कर सकता है। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी दबाव में नहीं झुकेगी।