पाकिस्तान के आतंकी दानव फिर सिर उठा रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा गाजा युद्ध की आड़ में ढांचा पुनर्जनन और भारत-विरोधी कैडर भर्ती में जुटे। एथेंस की रिपोर्ट से भंडाफोड़।
एफएटीएफ नजरों से बचने को फंडिंग मॉडल बदला—डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टो पर शिफ्ट। पाकिस्तान की आखिरी ग्रे लिस्टिंग ने इन्हें चालाक बनाया।
मसूद अजहर के परिजन हम्माद अजहर और तल्हा अल-सैफ आगे-आगे। गाजा सहायता, मस्जिद निर्माण (300+), नमाज चटाई के नाम पर ऑनलाइन चंदा, असल में आतंक कोष।
हमास के 7 अक्टूबर हमले के बाद अवसर मिला। पुराने पाकिस्तानी डायस्पोरा नेटवर्क खाड़ी-पश्चिम से फर्जी चैरिटी के जरिए पैसा भेजते, जो जम्मू-कश्मीर हिंसा और 2008 मुंबई कांड में लगा।
डिजिटल युग में ये संगठन ज्यादा खतरनाक। वैश्विक सतर्कता, पाक पर कार्रवाई जरूरी वरना नई साजिशें रचेंगें।