100 करोड़ से अधिक लोगों के लिए हिंदी सिर्फ बोलचाल नहीं, बल्कि भावनाओं का सच्चा माध्यम है। हिंदी दिवस पर इसकी यात्रा, प्रभाव और भविष्य पर नजर डालते हैं।
प्राकृत से खड़ी बोली तक की विकास यात्रा में हिंदी ने संस्कृत, उर्दू और लोकभाषाओं को अपनाया। 1949 का संकल्प इसे आधिकारिक मान्यता दिलाया, और हर साल 14 सितंबर को लाखों उत्सव होते हैं।
इसकी खूबसूरती बावों में है—प्रेमचंद की कहानियां समाज को जगाती हैं, कबीर के दोहे आत्मा को झकझोरते हैं। सिनेमा में हिंदी रोमांस और संघर्ष की कहानियां बुनती है। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी पॉडकास्ट, वीडियो और न्यूज प्रमुख हैं।
चुनौतियां हैं, जैसे अंग्रेजी का बोलबाला, लेकिन आकाशवाणी, दूरदर्शन और ऐप्स इसे पुनर्जीवित कर रहे। हिंदी राष्ट्रीय एकीकरण की कुंजी है। भविष्य में यह वैश्विक मंच पर चमकेगी, भावनाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाकर।