बीएमसी चुनावों की धूल फूटने से पहले मुंबई की राजनीति में भूचाल आ गया। एक नेता के ‘मुंबई में पैदा हुआ हूं इसलिए हकदार हूं’ बयान पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है, इसे सियासी चाल बताते हुए खारिज कर दिया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि शहर का विकास जाति-जन्म नहीं देखता। उन्होंने पूर्वी फ्रीवे, स्लम पुनर्वास और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार जैसे प्रोजेक्ट्स गिनाए। यह पलटवार विपक्ष के मूलभूतवादी एजेंडे को चुनौती देता है।
227 वार्डों वाले इस चुनाव में बीएमसी की कमान मिलना आर्थिक ताकत का प्रतीक है। शिवसेना गुटों के अलावा अन्य दल भी मैदान में हैं। जन्मभूमि विवाद ने मराठी मानूस वोट को केंद्र में ला दिया है।
भाजपा का दावा है कि उनके कार्यकाल में मुंबई बदली है, जबकि विपक्ष भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाता है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, युवा वोटर सक्रिय हैं।
चुनाव परिणाम गठबंधनों पर निर्भर करेंगे। यह टकराव मुंबई के भविष्य-निर्माण को परिभाषित करेगा, जहां प्रवासी और स्थानीय सबकी भागीदारी मायने रखती है।