क्रिप्टोकरेंसी ने निवेश की दुनिया बदल दी है। लेकिन यह रहस्यमयी संपत्ति वास्तव में क्या है? कैसे फंक्शन करती है और भारत सरकार इसके प्रति क्या रवैया अपना रही है? इस विस्तृत विश्लेषण में सबकुछ समझें।
यह डिजिटल करेंसी ब्लॉकचेन पर चलती है—एक सुरक्षित, विकेंद्रीकृत रजिस्टर जहां हर ट्रांजेक्शन स्थायी रूप से दर्ज होता है। न कोई मध्यस्थ, न फीस का बोझ।
कार्यप्रणाली सरल: लेन-देन ब्रॉडकास्ट होता है, नोड्स जांचते हैं, माइनर्स या स्टेकर्स वैलिडेट कर ब्लॉक जोड़ते हैं। प्रूफ-ऑफ-स्टेक ऊर्जा बचाता है। बिटकॉइन सीमित सप्लाई (21 मिलियन) से मूल्यवान।
वॉलेट्स प्राइवेट कीज सुरक्षित रखते हैं। एक्सचेंज ट्रेडिंग सुलभ बनाते हैं, स्टेकिंग पैसिव इनकम देती है।
जोखिम: हैकिंग, स्कैम्स, प्राइस स्विंग्स। फिर भी, वैश्विक अपनापन बढ़ रहा।
भारत में: 2018 बैन हटा, लेकिन 2022 एक्ट से 30% फ्लैट टैक्स, 1% TDS। लॉस सेटऑफ नहीं। एक्सचेंज FIU के अधीन, KYC सख्त। क्रिप्टो बिल लंबित, CBDC विकल्प।
G20 में भारत का नेतृत्व, लेकिन प्राइवेट क्रिप्टो पर संशय। युवा उत्साह से बाजार फल-फूल रहा।
जागरूक रहें, टैक्स फाइल करें। क्रिप्टो अवसरों का द्वार है—बुद्धिमानी से कदम बढ़ाएं।