खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने उत्साहजनक संबोधन में ऐलान किया कि भारत खेल इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय जी रहा है। ‘यह दौर हमारी आने वाली कार्रवाइयों पर निर्भर करेगा कि इतिहास इसे कैसे दर्ज करेगा,’ उन्होंने एथलीटों व अधिकारियों के समक्ष कहा।
हालिया वैश्विक मेडल तहलका मचा रहे हैं। मीराबाई चानू से रवि दहिया तक, युवा सितारे करोड़ों को प्रेरित कर रहे हैं।
मांडविया ने दीर्घकालिक रणनीतियां सुझाईं: आधुनिक स्टेडियम, उन्नत कोचिंग अकादमियां और पोषण सहायता। ‘जीत के साथ काम खत्म नहीं होता, उत्कृष्टता का पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।’
आलोचक फंडिंग व नौकरशाही बाधाओं की ओर इशारा करते रहे हैं, लेकिन मंत्री ने सुधारों का वादा किया। नई राष्ट्रीय नीति स्कूल पाठ्यक्रम में खेल को शामिल करेगी और तकनीक से प्रदर्शन विश्लेषण करेगी।
सफलता के उल्लास में, मांडविया का आह्वान गूंज रहा है। 2028 ओलंपिक नजदीक आते ही भारत चौराहे पर है। क्या यह सुनहरा मौका पकड़कर खेल महाशक्ति बनेगा? आने वाले वर्ष बताएंगे।