दादरा नगर हवेली व दमन दीव में मल्लखंब का जलवा छा रहा है, इसके पीछे है शुभम मैयर की अथक मेहनत। यह खेल, जिसमें खंभे पर उड़न-भरते कलाबाजियां देखने को मिलती हैं, अब युवाओं का पहला चुनाव बन गया है।
महाराष्ट्र की धरोहर मल्लखंब शारीरिक बल, संतुलन व लचीलापन सिखाता है। शुभम, जो स्वयं चैंपियन रह चुके हैं, ने 2019 में समुद्र तटों पर सत्र प्रारंभ किए। जिज्ञासु किशोरों की संख्या 20 से उछलकर 350 पहुंच गई।
18 केंद्रों पर दैनिक अभ्यास, महिलाओं के लिए विशेष लीग—शुभम की रणनीति काम कर रही। ग्राम पंचायतें उपकरण मुहैया करा रही हैं, होटल पर्यटकों को प्रदर्शन दिखाते। इंस्टाग्राम रील्स ने लाखों व्यूज जुटाए।
राह कठिन रही—आर्थिक तंगी, मौसमी बाधाएं। शुभम ने ऑनलाइन ट्यूटोरियल व सहकर्मी प्रशिक्षण से पार पाया। जोनल चैंपियनशिप में सफलता ने उत्साह दोगुना कर दिया।
भविष्य में स्टेडियम व वैश्विक आदान-प्रदान की योजना है। शुभम का संदेश स्पष्ट: ‘मल्लखंब से संस्कृति जागेगी, युवा मजबूत होंगे।’ इन संघ क्षेत्रों में यह खेल अब स्थायी पहचान बनने को तैयार है।